Wednesday, November 25, 2009

बारहा मुझको खलिश सिर्फ़ तेरे यादों की,
कितनी बेतरह से मसरूफ किया है हरदम;
हमनवां हमने फिर भी तेरे यादों की कसम,
तीरगी में भी तेरा नाम लिया है हरदम.
तेरे रुखसार पे पिन्हा वो पशेमां की शफ़क,
तीरगी में भी शुआवों का काम करती है ;
तू है शहकार किसी दक्ष मुसव्विर की सनम ,
मेरे मफ्लूक दहर चमनजार करती है.

Wednesday, September 16, 2009

दर्द बाकी है जब तलक किसी के सीने में
हम न शिकवा करेंगे मुस्कुरा के जीने में ,
हर तरफ़ टूट के बिखरे हैं अश्क के मोती
वक्त गुजरे किसी के चाक जिगर सीने में .