बारहा मुझको खलिश सिर्फ़ तेरे यादों की,
कितनी बेतरह से मसरूफ किया है हरदम;
हमनवां हमने फिर भी तेरे यादों की कसम,
तीरगी में भी तेरा नाम लिया है हरदम.
तेरे रुखसार पे पिन्हा वो पशेमां की शफ़क,
तीरगी में भी शुआवों का काम करती है ;
तू है शहकार किसी दक्ष मुसव्विर की सनम ,
मेरे मफ्लूक दहर चमनजार करती है.
Wednesday, November 25, 2009
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