वो कौन है जो देखता है रहगुजर की तरह
सड़क पे साथ साथ चलते हमसफ़र की तरह।
कभी जो लाद्खादा के पांव ये बहकते हैं
तो थम लेता है बाँहों में जो दिलबर की तरह।
हर एक नदी से बहके आते हुए कतरों को
जो सोख लेता है अपने में समंदर की तरह।
खिजां के खौफ से खामोश हो जब हर डाली
गुलों में रंग वो लाता है मुसव्विर की तरह।
सड़क पे साथ साथ चलते हमसफ़र की तरह।
कभी जो लाद्खादा के पांव ये बहकते हैं
तो थम लेता है बाँहों में जो दिलबर की तरह।
हर एक नदी से बहके आते हुए कतरों को
जो सोख लेता है अपने में समंदर की तरह।
खिजां के खौफ से खामोश हो जब हर डाली
गुलों में रंग वो लाता है मुसव्विर की तरह।


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